बलरामपुर सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य के वरहवा रेंज मे मादा तेंदुए के पकड़े जाने के बाद वन विभाग टीम ने

बलरामपुर सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य के वरहवा रेंज मे मादा तेंदुए के पकड़े जाने के बाद वन विभाग टीम ने

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बलरामपुर सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य के वरहवा रेंज मे मादा तेंदुए के पकड़े जाने के बाद वन विभाग टीम ने अब नर तेंदुए की तलाश शुरू की है। मादा तेंदुआ को कानपुर चिड़िया घर भेजा जाएगा।शुक्रवार को टीम ने तेंदुआ छिपे होने के संभावित ठिकानों पर जाकर निगरानी की देर शाम हाईजेनिक ड्रोन कैमरा उड़ाकर तेंदुए का लोकेशन पता करने का प्रयास शुरू किया गया। सेफ्टी ट्रैक्टर व मचान पर बैठकर नर तेंदुए को भी जाल में फंसाने की योजना बनाई गई है।

तराई क्षेत्र में तेंदुए का खौफ कम नहीं हो रहा है। डेढ़ माह के बीच आधा दर्जन बच्चे तेंदुए का शिकार बन चुके हैं। और दर्जनभर निर्राश्रित मवेशी शिकार बन चुके है, हॉलाकि मादा तेंदुए के पकड़े जाने के बाद लोगों के मन से खौफ कम हुआ है, लेकिन वे पूरी तरह सतर्क हैं। मादा के साथ-साथ नर तेंदुआ भी देखे जाने की बात कई बार सामने आई है। नर तेंदुए को पकड़ने के लिए अभी कई टीमें काम कर रही हैं। डीएफओ डा. एम सेम्मारन के मुताविक 11 पिंजरे व 25 कैमरे लगे हैं। इसके अतिरिक्त हाईजेनिक ड्रोन कैमरे की मदद से नर तेंदुए का लोकशन ट्रैस करने की कोशिश की जा रही है।

विभाग का मानना है कि तराई क्षेत्र को पूरी तरह तेंदुए के खौफ से मुक्त कराया जाना है। डीएफओ के मुताविक तेंदुआ देर शाम व भोर पहर सक्रिय होता है। वन विभाग टीम ने पांच बजे शाम को सेफ्टी ट्रैक्टर व मचान पर तेंदुए की निगरानी के लिए कमान संभाल ली है। कुछ ही दिनों में नर तेंदुए को भी पकड़ लिया जाएगा। वन विभाग टीम डेढ़ माह से तराई में आतंक का पर्याय बनी मादा तेंदुए को ट्रेंकुलाइज करने में सफल रहा। उसे बहदिनवा नाले में पकड़ा गया। जाल में फंसाकर उसे पिंजरे में कैद किया गया। मादा तेंदुए को बेहोशी की हालत में जनकपुर रेंज कार्यालय लाया गया था। ठीक एक घंटे बाद वह होश में आ गई थी, लेकिन पूरी तरह सेंस में नहीं थी। विशेषज्ञों के मुताविक ट्रेंकुलाइज किए जाने के बाद वन्यजीव को भूख नहीं लगती। मादा तेंदुए की भूख व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वन्यजीव विशेषज्ञ डा. आरके सिंह ने सिरिंज के माध्यम से तेंदुए के मुंह में दवा डाली। पिंजरे में कैद तेंदुआ देखने को रेंज कार्यालय के बाहर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा रही। जो बच्चे तेंदुए के हमले में मारे गए हैं, उनके परिवारीजन भी जनकपुर रेंज पहुंचे थे। वह बाहर खड़े-खड़े तेंदुए को कोस रहे थे। उनका कहना था कि तेंदुए ने उनका परिवार उजाड़ दिया है। वे आज भी अपने जिगर के टुकड़े को भूल नहीं पा रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि अभी और भी तेंदुए क्षेत्र में टहल रहे हैं। घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए उन्हें भी पकड़ना होगा।

नाला किनारे झाड़ियों में और तेंदुओं के होने की संभावना : मादा तेंदुए ने बहदिनवा नाला किनारे सघन झाड़ियों को अपना प्राकृत वास बना रखा था। नाला किनारे झाड़ियों में और तेंदुओं के होने की संभावना है। डीएफओ का दावा है कि बहदिनवा नाला किनारे सेफ्टी ट्रैक्टर अभी खड़ा है। मचान भी उजाड़ा नहीं गया है। वन कर्मी तेंदुए पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ड्रोन कैमरे को भी वापस नहीं भेजा गया है सर्च अभियान अभी चलता रहेगा। ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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