भाषा कोई भी हो वह दिलों को जोड़ने का कार्य करती है-महामहिम राज्यपाल,अंतर्राष्ट्रीय शायर अफजल मंगलौरी की नई किताब “तेरे बाद” का देहरादून में विमोचन

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देहरादून/रुडकी(संदीप तोमर)।उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सरदार गुरमीत सिंह ने कहा है कि भाषाएं हमेशा एकता व सद्भावना का संदेश देती हैं।भाषा कोई भी हो वह दिलों को जोड़ने का कार्य करती है और मनुष्य को सत्य का मार्ग दिखाती है। विगत दिवस देहरादून में भाषा संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय बहुभाषी पुस्तक मेले के समापन समारोह में उत्तराखंड के बीस रचनाकारों की पुस्तक का विमोचन करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सरदार गुरमीत सिंह ने कहा कि किताबें मुनष्य की सच्ची दोस्त होती हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय शायर और उत्तराखंड उर्दू अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष अफजल मंगलौरी की पुस्तक के अवलोकन पर कहा कि मंगलौरी ने जहाँ कवि सम्मेलनों व मुशायरों के माध्यम से उत्तराखंड राज्य का नाम देश तथा विदेशों में रौशन किया है,वहीं अब किताबों की दुनिया में भी उनकी नई किताब “तेरे बाद” पाठकों और शायरी से लगाव रखने वाले लोगों के लिए लाभकारी साबित होगी।उत्तराखंड के वन व भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि अफजल मंगलौरी की यह पुस्तक भाषा संस्थान के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित की गई है,जिसका विमोचन गत दिवस उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था। राज्यपाल व भाषा मंत्री ने अफजल मंगलौरी को बधाई देते हुए उनकी शायरी की प्रशंसा करते हुए भविष्य में और सुंदर लेखन व राष्ट्रीयता से ओतप्रोत कविताएं लिखने की कामना की।इस मौके पर उत्तराखंड के वरिष्ठ विधायक खजान दास,भाषा संस्थान की निदेशक स्वाति भदौरिया,साहित्यकार दाता राम पुरोहित,डॉ०कुमुदिनी नौटियाल,अम्बर खरबंदा,प्रबोध उनियाल,शमा परवीन,विकास वशिष्ठ,राकेश घनसाला आदि मौजूद रहे। अंत में साहित्यकारों ने उत्तराखंड राजभवन में वसन्तोत्सव में पुष्प प्रदर्शनी में शिरकत की।

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